Friday, 13 March 2026

 यात्री बनना ज़रूरी है,

क्योंकि ज़िंदगी की सारी सच्चाइयाँ किताबों में नहीं लिखी होतीं।
कुछ सबक शब्दों में नहीं, रास्तों की धूल में छिपे होते हैं।

जब दिल टूटा होता है, मन थका होता है,
तब सफ़र हमें धीरे-धीरे समझाता है
कि दर्द भी एक शिक्षक है,
और समय उसका सबसे धैर्यवान गुरु।

अनजाने शहर, अजनबी चेहरे,
राह में मिलती छोटी-छोटी बातें,
और सफ़र की टूटी हुई सड़कें
हमें वह सिखा देती हैं
जो किसी विद्यालय में नहीं सिखाया जाता।

तब समझ आता है कि जीवन
सिर्फ़ मंज़िल तक पहुँचने का नाम नहीं,
बल्कि रास्तों में बदलते हुए
खुद को पहचानने का नाम है।

और अंत में,
जब हम मंज़िल तक पहुँचते हैं,
तो पता चलता है
हम सिर्फ़ दुनिया देखने नहीं निकले थे,
हम तो खुद को खोजने की यात्रा पर थे।

क्योंकि जीवन एक किताब नहीं,
एक लंबा सफ़र है
जिसे समझने के लिए
यात्री बनना पड़ता है।