Wednesday, 7 October 2026


कुछ बातें तेरी याद रहीं,

कुछ मेरी ख़ामोशी में थीं,

पता दोनों को है 

मंज़िलें अपनी एक नहीं थीं।


फिर भी जब हम तुम मिले,

दिल ने थोड़ा चैन लिया,

कहा कुछ नहीं तुमने,

पर दिल ने कुछ महसूस किया।


सोचा, शायद तुम भी कभी-कभी,

मेरी तरह ठहर जाते हो,

कोई मेरी बात याद करके,

बे-वजह मुस्कुराते हो।



ना वादा, ना कोई हक़ अपना,

ना कल का कोई ख़्वाब रखा,

जितना मिला, उतना जी लिया,

बाक़ी उस पर छोड़ दिया।



कभी तुम्हारी हँसी याद आई,

कभी वो अधूरी-सी शाम,

लगा तुम सामने बैठे हो,

और चलती रही घंटों बात।


कभी मेरी उलझन पढ़ ली तुमने,

कभी मैंने तुम्हारी थकान सुनी,

कोई वादा नहीं दरमियाँ अपने,

फिर भी कमी तुम्हारी लगी।



तेरी बातों में सुकून था,

मेरी बातों में ठहराव,

तुम मेरे थे ही नहीं कभी,

फिर क्यों इतना ये लगाव?


शायद तुमने चाहा हो मुझे,

या शायद बस मेरी फ़िक्र रही,

जो भी था, ख़ूबसूरत था,

उसे नाम देने की ज़िद नहीं।



कुछ लोग मिलते हैं ज़िंदगी के सफ़र में,

पर सफ़र उनका पूरा नहीं होता,

रखते हैं याद एक-दूसरे को,

हर रिश्ता मुकम्मल नहीं होता।



कल फिर अपनी-अपनी राहें होंगी,

शायद ये बातें भी ना होंगी,

हो जाएँ मशग़ूल अपनी ज़िंदगी में,

पर ये गुफ़्तगू याद रहेगी।


हाँ…

ये गुफ़्तगू याद रहेगी।

Tuesday, 6 October 2026

 सुकून वहीं है जहाँ उम्मीदें कम और शुक्रिया ज़्यादा हो,

ज़िंदगी को जीते रहिए… हर खुशी के लिए वजह ज़रूरी नहीं।

 दिन में मिलते नहीं तुम,

रातों को रोज़ाना आना-जाना है तुम्हारा।

ख़्वाबों में चुपके से आते हो,
फिर दिल चुरा ले जाना है हमारा
नींद मेरी, बातें तुम्हारी,
रातों का ये सिलसिला पुराना है हमारा।
सुबह होते ही खो जाते हो कहीं,
बस रात में ही  आना जाना  है तुम्हारा।
दिल को अब आदत सी हो गई तुम्हारी ,
बस अब हर रात इंतज़ार करना काम है हमारा

 मिल जाते हैं यूँ ही सफ़र में वो,

जिनसे हो जाता है गहरा दोस्ताना।
धीरे-धीरे दिल के क़रीब आना,
रोज़-रोज़ नई-नई बातें बनाना,
और न जाने कब आदत बन जाना।

कभी हँसी है, कभी उदासी,
कभी दिल की कुछ ख़ामोशी,
मुश्किल जो बातें करने में बयां,
फिर तुमसे ही वो सब कुछ कह जाना।

न कोई सवाल, न कोई गिला,
बस एक सुकून सा मिला है।
दुनिया में अपनी-अपनी मसरूफ़,
हर रिश्ते की अपनी है मजबूरी।
हर सफ़र में लगता है लेकिन,
धीरे-धीरे कम हो रही दूरी।

न कहना ज़रूरी, न सुनना ज़रूरी,
आँखें मिले और समझ लेना ज़रूरी।
शायद तुम भी कुछ सोचती हो,
शायद मैं भी कुछ कहता नहीं।
कुछ बातें आँखों तक आती हैं,
पर लफ़्ज़ों में ढलती नहीं।

न कोई सवाल, न कोई जवाब,
न कोई मंज़िल, न कोई हिसाब।
रोज़-रोज़, रोज़ाना तेरा यूँ ही मिल जाना,
गहरा होता दिन-ब-दिन अपना दोस्ताना।

मिल जाते हैं यूँ ही सफ़र में वो,
जिनसे हो जाता है गहरा दोस्ताना।
धीरे-धीरे दिल के क़रीब आना,
रोज़-रोज़ नई-नई बातें बनाना।

 


वो बोले 
“कहाँ रह गए…
या चले गए तुम कोई और गली?”

हम मुस्कुरा दिए,
और धीरे से बोले 
“गुफ़्तगू ख़ुद से,
ख़ुद के बारे में,
बहुत देर तक चली…”

दिल में रह गईं कुछ बातें,
कुछ आँखों ने कह दीं,
ख़ामोश रहे लब मगर,
धड़कनों ने सब कह दीं।

कभी ख़ामोशी दोनों के दरमियाँ,
तो कभी बातों का सिलसिला है…
वजह अलग-अलग है,
फिर भी दर्द एक-सा है…

एक दिल मोहब्बत छुपा रहा है,
दूसरा मोहब्बत में पड़ जाने से डर रहा है…
एक पास आना चाहता है, दूजा ख़ुद से ही लड़ रहा है…

कहानी दोनों की एक है ,बस रास्ते जुदा-जुदा हैं…
एक दिल इश्क़ कह नहीं पा रहा,दूजा इश्क़ सुन नहीं पा रहा है…

बारिश की बूँदें आसमाँ से यूँ गिर रही हैं,
जैसे ‘अर्श’ से ‘ख़ाक’ को मिलने की फ़रियाद हो…
हर बूँद में जैसे कोई अधूरी दास्ताँ,हर बूँद के पीछे किसी दिल की बात हो…

चुपचाप हम रहे भीगते,वो दूर खड़े देखते रहे…
कुछ कहना था दोनों को,दोनों ही मगर चुप रहे…

कभी सवाल थे आँखों में,कभी होंठों पे इनकार…
कहता रहा दिल  “रुक जाओ”,
कहता रहा डर “न करो प्यार”…

एक दिल मोहब्बत छुपा रहा है,
दूसरा मोहब्बत में पड़ जाने से डर रहा है…
एक दिल इश्क़ कह नहीं पा रहा,
दूजा इश्क़ सुन नहीं पा रहा है…

किसी शाम शायद,ये ख़ामोशी भी टूटेगी…
किसी बारिश में शायद,ये दूरी भी छूटेगी…

तुम पूछ लेना फिर कहाँ रह गए थे?”

हम कह देंगे हँसकर “यहीं थे…

बस तुमसे मोहब्बत करने से
ख़ुद को रोक रहे थे…”

एक दिल मोहब्बत छुपा रहा है,
दूसरा मोहब्बत में पड़ जाने से डर रहा है…
दोनों को पता है इश्क़ क्या है,
फिर भी कोई इज़हार से डर रहा है…

बूँदें यूँ ही गिरती रहें,
अर्श और ख़ाक मिलते रहें…
हम तुमसे दूर सही, मगर दिल​ से कैसे दूर रहें…

एक दिन शायद ये फ़ासले मिट जाएँ,
ये ख़ामोशियाँ शायद गीत बन जाएँ…
और जो बात आज दिल में कहनी है,
वो कल लफ़्ज़ बनकर
लबों तक आ जाए…

 कब तक रहूँ खड़ा दृढ़ हर वक़्त, इस मदमाते, आते बार बार तूफ़ान में,

अंदर से रोता दिल पर ऊपर से हँसना, खड़ा हूँ दृढ़ मगर हूँ परेशान मैं।

जब राहें धुंधली हो जाएँ, जब कोई दिखाई न दे ​​किनारा ,

​प्रभु आपका नाम रहे होठों पर, ​रहे ​हर घडी साथ तुम्हारा

​​रखना हाथ अपना सर पे उनके , कर दो जीवन मैं उजियारा

नैय्या जिन जिन की डूब रही थी उन सबको प्रभु तुमने है तारा

​प्रभु  आपका नाम रहे होठों पर, ​सदा रहे सर पे हाथ तुम्हारा

मैं थक गया हूँ प्रभु, अब आप ही मेरा हौसला बन जाना,

जो मेरे बस में नहीं रहा, उसे आप संभाल लेना।

खड़ा हूं अडिग हर आते तूफान में सिर्फ आपके ही सहारे,

सब सौंप दिया आपको प्रभु, आप ही अब मेरी नौका तारे।

 कितने ज़ख़्म लिए फिरती है, मिलती फिर भी मुस्कुराकर,

तन्हा-तन्हा सी लगती है, भीड़ में भी खुद को छुपाकर।

एक अजनबी मिला, जो अपना सा  लगा,
 ख़ामोशी में भी, कोई रिश्ता सा पकने लगा।

एक ही राह, एक सफ़र, एक ही रास्ता,
बिन कहे समझ ले जो हर  दर्द,
हर एक वास्ता।

कहना न पड़े दर्द, कोई चुपचाप सुन ले,
आँखें नम हों अगर, कोई होंठों से चुन ले।

रखें दूरियाँ दरमियाँ, कहीं कोई ख़्वाब न बुन ले,
समझाएँ दिल को, कब दिल किसी की सुन ले।
​

यूँ ही मिल जाते हैं रिश्ते, दिलों के बिना नाम के,
जुड़ जाए दिल किसी से, तो फिर क्या उसे नाम दें,
रिश्ते बस महसूस हों जो, उन्हें क्या ही अल्फ़ाज़ दें।

लब कुछ नहीं कहते, ख़ामोशी बहुत कुछ बयान करती है,
ज़ुबाँ भी मोहब्बत है शायद…
मगर ये कहने से अब डरती है।