Monday, 18 May 2026

 ये तस्वीर सिर्फ एक butterfly नहीं…

बल्कि कुछ लोगों की ख़ामोश हक़ीक़त है।

बाहर से वो बिल्कुल मुकम्मल दिखाई देते हैं…
मुस्कुराते हुए,
हमेशा दूसरों के लिए मौजूद,
हमेशा किसी का सहारा बनने को तैयार।

लेकिन उनके अंदर
एक हिस्सा ऐसा भी होता है
जो ख़ामोशी से बिखर चुका होता है।

वो अपने दर्द का शोर नहीं करते,
बस उसे अपनी फ़ितरत का हिस्सा बना लेते हैं।

अजीब बात है ना…
कुछ लोग दुनिया को सुकून बाँटते बाँटते
खुद अंदर से वीरान हो जाते हैं।

शायद इसलिए हर मुस्कुराता चेहरा
हमेशा खुश हो…
ये ज़रूरी नहीं होता।

कुछ रूहें
अपनी टूटन को भी
बड़ी तहज़ीब से छुपाना जानती हैं।

— Ravi

 कभी दोनों के दरमियाँ ख़ामोशी ,तो कभी बातो का सिलसिला है 

मगर वजह अलग अलग। 

एक दिल मोहब्बत छुपा रहा है, और दूसरा मोहब्बत में पड़ जाने से डर रहा है।   

Thursday, 14 May 2026

 तस्वीरें बदलते वक़्त को समेटने का

बहुत खूबसूरत आईना होती हैं।

बड़े होते हुए बदलते चेहरे…
सफ़र, ख़ामोशियाँ,
टूटना… संभलना…
और वक़्त के साथ बदलता इंसान।

कभी इन्हें देखकर आँखें नम हो जाती हैं,
तो कभी कोई पुराना पल याद आकर
चेहरे पर मुस्कान छोड़ जाता है।

शायद इसलिए कुछ तस्वीरें सिर्फ तस्वीरें नहीं होतीं…
वो हमारी ज़िंदगी के जीए हुए हिस्से होती हैं।

यूँ ही इन पलों को सहेज कर रखिए… 

 “We don’t have people…

we are the people that people have.”

कुछ लोग ऐसे होते हैं,
जिनके पास लोग नहीं होते…
बल्कि वो खुद लोगों का सहारा होते हैं।

हर किसी को संभालते संभालते,
वो खुद कब अंदर से थक जाते हैं,
शायद उन्हें भी पता नहीं चलता।

लोग उनमें अपना सुकून,
कोई अपना “घर”,
और कोई अपने दुखों का हमराज़ ढूँढ लेता है…

और वो खुद,
अंदर ही अंदर बेघर होकर जीना सीख लेते हैं।

फिर भी वो मुस्कुराते हैं,
क्योंकि उन्हें आदत होती है
खुद से ज़्यादा दूसरों को संभालने की।


एक नज़रिया ये भी है…

अगर आप किसी के बिना भी सुकून से रह सकते हैं,
लेकिन फिर भी उसका साथ चुनते हैं…
तो वो मोहब्बत है।

लेकिन अगर उसके बिना हर चीज़ अधूरी,
बेचैन और बोझिल लगने लगे,
तो वो मोहब्बत नहीं,
सिर्फ एक आदत है।

हम अक्सर आदत को इश्क़ समझ बैठते हैं,
और फिर रिश्तों में गलतफ़हमियाँ पैदा होने लगती हैं।

असल मोहब्बत किसी को क़ैद नहीं करती,
बल्कि उसे बढ़ने का हौसला देती है।
उसकी आज़ादी भी बचाए रखती है
और रिश्ता भी।

क्योंकि मोहब्बत का मतलब सिर्फ साथ रहना नहीं,
बल्कि एक दूसरे की ज़िंदगी में सुकून बनना होता है।


 कुछ लोग सफर को छोटा नहीं करते…

बस उसे सुकून वाला बना देते हैं।

रोज़ वही रास्ते, वही ट्रैफिक, वही भागदौड़…
कभी बातें…
कभी ख़ामोशी…
कभी ज़िंदगी की बातें,
तो कभी अपनी छोटी छोटी कहानियाँ।

बिंदास बातें…
ना किसी judgement का डर,
ना कुछ बनने का दिखावा…
सिर्फ एक दूसरे की क़द्र।

फिर पता ही नहीं चलता,
कब लंबा रास्ता भी
मिनटों में ख़त्म हो जाता है।


Thursday, 16 April 2026

ये भी एक कड़वा सच है…

कमज़ोर दिनों में हम अक्सर लोगों का हाथ थामकर उन्हें मझधार से किनारे तक लाने की कोशिश करते हैं। उस सफ़र में न कोई शर्त होती है, न कोई हिसाब बस साथ निभाने की सच्ची नीयत होती है और सबको साथ लेकर आगे बढ़ने का जज़्बा।

मगर अजीब बात है, जैसे-जैसे किनारा करीब आता है और हालात सुधरने लगते हैं, लोगों का रवैया भी बदलने लगता है।

तकलीफ़ में जिनका हाथ पकड़कर मझधार से किनारे तक लेकर आए,

जैसे-जैसे किनारा पास आता गया,

हुजूम में उनके नखरे बढ़ते गए रवि...

शायद यही ज़िंदगी का एक सच्चा, लेकिन कड़वा पहलू है मुसीबत में रिश्ते गहरे लगते हैं, और हालात बदलते ही उनका रंग भी बदल जाता है।

लोग कहते हैं, ऐसे लोगों के साथ वैसा ही करना चाहिए जिसके वो हक़दार हैं, मगर समझ यही कहती है लोगों का साथ देना छोड़ो मत, सिर्फ इस वजह से कि लोग बदल जाते हैं। हाँ, अपनी उम्मीदों को हल्का ज़रूर रखो।

क्योंकि सुकून इस बात में नहीं कि सामने वाला वैसा ही रहे, बल्कि इस बात में है कि हम अपने आप को न बदलें वो भी दूसरों की वजह से। और जहाँ तक हिसाब की बात है, वो तो हर किसी का होता है… आज नहीं तो कल।

आगे के लिए बस यही सीख साथ रखो खुद पर थोड़ा और काम करो, खुद को और मज़बूत बनाओ, ताकि अगली बार वो न झेलना पड़े, जिससे आज तुम्हें दो-चार होना पड़ रहा है।