Thursday, 16 April 2026

ये भी एक कड़वा सच है…

कमज़ोर दिनों में हम अक्सर लोगों का हाथ थामकर उन्हें मझधार से किनारे तक लाने की कोशिश करते हैं। उस सफ़र में न कोई शर्त होती है, न कोई हिसाब बस साथ निभाने की सच्ची नीयत होती है और सबको साथ लेकर आगे बढ़ने का जज़्बा।

मगर अजीब बात है, जैसे-जैसे किनारा करीब आता है और हालात सुधरने लगते हैं, लोगों का रवैया भी बदलने लगता है।

तकलीफ़ में जिनका हाथ पकड़कर मझधार से किनारे तक लेकर आए,

जैसे-जैसे किनारा पास आता गया,

हुजूम में उनके नखरे बढ़ते गए रवि...

शायद यही ज़िंदगी का एक सच्चा, लेकिन कड़वा पहलू है मुसीबत में रिश्ते गहरे लगते हैं, और हालात बदलते ही उनका रंग भी बदल जाता है।

लोग कहते हैं, ऐसे लोगों के साथ वैसा ही करना चाहिए जिसके वो हक़दार हैं, मगर समझ यही कहती है लोगों का साथ देना छोड़ो मत, सिर्फ इस वजह से कि लोग बदल जाते हैं। हाँ, अपनी उम्मीदों को हल्का ज़रूर रखो।

क्योंकि सुकून इस बात में नहीं कि सामने वाला वैसा ही रहे, बल्कि इस बात में है कि हम अपने आप को न बदलें वो भी दूसरों की वजह से। और जहाँ तक हिसाब की बात है, वो तो हर किसी का होता है… आज नहीं तो कल।

आगे के लिए बस यही सीख साथ रखो खुद पर थोड़ा और काम करो, खुद को और मज़बूत बनाओ, ताकि अगली बार वो न झेलना पड़े, जिससे आज तुम्हें दो-चार होना पड़ रहा है।

Friday, 13 March 2026

यात्रा करना ज़रूरी है,

क्योंकि ज़िंदगी की सारी सच्चाइयाँ किताबों में नहीं लिखी होतीं।
कुछ सबक शब्दों में नहीं, रास्तों की धूल में छिपे होते हैं।

जब दिल टूटा होता है, मन थका होता है,
तब सफ़र हमें धीरे-धीरे समझाता है
कि दर्द भी एक शिक्षक है,
और समय उसका सबसे धैर्यवान गुरु।

अनजाने शहर, अजनबी चेहरे,
राह में मिलती छोटी-छोटी बातें,
और सफ़र की टूटी हुई सड़कें
हमें वह सिखा देती हैं
जो किसी विद्यालय में नहीं सिखाया जाता।

तब समझ आता है कि जीवन
सिर्फ़ मंज़िल तक पहुँचने का नाम नहीं,
बल्कि रास्तों में बदलते हुए
खुद को पहचानने का नाम है।

और अंत में,
जब हम मंज़िल तक पहुँचते हैं,
तो पता चलता है
हम सिर्फ़ दुनिया देखने नहीं निकले थे,
हम तो खुद को खोजने की यात्रा पर थे।

क्योंकि जीवन एक किताब नहीं,
एक लंबा सफ़र है
जिसे समझने के लिए
यात्रा करना ज़रूरी है

Tuesday, 14 October 2025

 जिस शख़्स की थोड़ी-सी कामयाबी देखकर जलते हो तुम आज कल,
वो भी कभी तुम्हारी ही तरह गिरा था  फर्क बस इतना है, वो उठा बार-बार।
जलन छोड़, मेहनत से नाता जोड़ ऐ दोस्त,
किस्मत भी झुकती है उसी के आगे जो हार मानता नहीं बार-बार।

 ज़िंदगी में,

जब-जब जैसा किरदार पड़ा, बना लिया हमने।
हम सिर्फ़ अच्छे कहाँ —
बुराई भी बेहिसाब है अपने अंदर।


मिलता ही कहाँ है वो सब कुछ जिसे चाहता है ज़िंदगी में, आदमी
उसे पाने की चाहत में उल्टा, जो है, उसे भी खोए चला जा रहा है आदमी।

 जब कभी भी मिले, मिले मुझे सब देवता लोग,

एक मैं ही हूँ जो करता हूँ ग़लतियों पे ग़लतियाँ,
बाकी सब ज्ञानी बहुत हैं।

 ज़िंदगी अगर शुरू से आसान होती,

तो लोग रब को याद ही क्यों करते।
थोड़े हिचकोले ज़िंदगी में ,ही तो बताते हैं,
हारना नहीं है — अभी सफ़र बाक़ी बहुत है।