कुछ लोग सफर को छोटा नहीं करते…
बस उसे सुकून वाला बना देते हैं।
रोज़ वही रास्ते, वही ट्रैफिक, वही भागदौड़…
कभी बातें…
कभी ख़ामोशी…
कभी ज़िंदगी की बातें,
तो कभी अपनी छोटी छोटी कहानियाँ।
बिंदास बातें…
ना किसी judgement का डर,
ना कुछ बनने का दिखावा…
सिर्फ एक दूसरे की क़द्र।
फिर पता ही नहीं चलता,
कब लंबा रास्ता भी
मिनटों में ख़त्म हो जाता है।
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