Thursday, 14 May 2026

 तस्वीरें बदलते वक़्त को समेटने का

बहुत खूबसूरत आईना होती हैं।

बड़े होते हुए बदलते चेहरे…
सफ़र, ख़ामोशियाँ,
टूटना… संभलना…
और वक़्त के साथ बदलता इंसान।

कभी इन्हें देखकर आँखें नम हो जाती हैं,
तो कभी कोई पुराना पल याद आकर
चेहरे पर मुस्कान छोड़ जाता है।

शायद इसलिए कुछ तस्वीरें सिर्फ तस्वीरें नहीं होतीं…
वो हमारी ज़िंदगी के जीए हुए हिस्से होती हैं।

यूँ ही इन पलों को सहेज कर रखिए… 

 “We don’t have people…

we are the people that people have.”

कुछ लोग ऐसे होते हैं,
जिनके पास लोग नहीं होते…
बल्कि वो खुद लोगों का सहारा होते हैं।

हर किसी को संभालते संभालते,
वो खुद कब अंदर से थक जाते हैं,
शायद उन्हें भी पता नहीं चलता।

लोग उनमें अपना सुकून,
कोई अपना “घर”,
और कोई अपने दुखों का हमराज़ ढूँढ लेता है…

और वो खुद,
अंदर ही अंदर बेघर होकर जीना सीख लेते हैं।

फिर भी वो मुस्कुराते हैं,
क्योंकि उन्हें आदत होती है
खुद से ज़्यादा दूसरों को संभालने की।


एक नज़रिया ये भी है…

अगर आप किसी के बिना भी सुकून से रह सकते हैं,
लेकिन फिर भी उसका साथ चुनते हैं…
तो वो मोहब्बत है।

लेकिन अगर उसके बिना हर चीज़ अधूरी,
बेचैन और बोझिल लगने लगे,
तो वो मोहब्बत नहीं,
सिर्फ एक आदत है।

हम अक्सर आदत को इश्क़ समझ बैठते हैं,
और फिर रिश्तों में गलतफ़हमियाँ पैदा होने लगती हैं।

असल मोहब्बत किसी को क़ैद नहीं करती,
बल्कि उसे बढ़ने का हौसला देती है।
उसकी आज़ादी भी बचाए रखती है
और रिश्ता भी।

क्योंकि मोहब्बत का मतलब सिर्फ साथ रहना नहीं,
बल्कि एक दूसरे की ज़िंदगी में सुकून बनना होता है।


 कुछ लोग सफर को छोटा नहीं करते…

बस उसे सुकून वाला बना देते हैं।

रोज़ वही रास्ते, वही ट्रैफिक, वही भागदौड़…
कभी बातें…
कभी ख़ामोशी…
कभी ज़िंदगी की बातें,
तो कभी अपनी छोटी छोटी कहानियाँ।

बिंदास बातें…
ना किसी judgement का डर,
ना कुछ बनने का दिखावा…
सिर्फ एक दूसरे की क़द्र।

फिर पता ही नहीं चलता,
कब लंबा रास्ता भी
मिनटों में ख़त्म हो जाता है।