Thursday, 16 April 2026

ये भी एक कड़वा सच है…

कमज़ोर दिनों में हम अक्सर लोगों का हाथ थामकर उन्हें मझधार से किनारे तक लाने की कोशिश करते हैं। उस सफ़र में न कोई शर्त होती है, न कोई हिसाब बस साथ निभाने की सच्ची नीयत होती है और सबको साथ लेकर आगे बढ़ने का जज़्बा।

मगर अजीब बात है, जैसे-जैसे किनारा करीब आता है और हालात सुधरने लगते हैं, लोगों का रवैया भी बदलने लगता है।

तकलीफ़ में जिनका हाथ पकड़कर मझधार से किनारे तक लेकर आए,

जैसे-जैसे किनारा पास आता गया,

हुजूम में उनके नखरे बढ़ते गए रवि...

शायद यही ज़िंदगी का एक सच्चा, लेकिन कड़वा पहलू है मुसीबत में रिश्ते गहरे लगते हैं, और हालात बदलते ही उनका रंग भी बदल जाता है।

लोग कहते हैं, ऐसे लोगों के साथ वैसा ही करना चाहिए जिसके वो हक़दार हैं, मगर समझ यही कहती है लोगों का साथ देना छोड़ो मत, सिर्फ इस वजह से कि लोग बदल जाते हैं। हाँ, अपनी उम्मीदों को हल्का ज़रूर रखो।

क्योंकि सुकून इस बात में नहीं कि सामने वाला वैसा ही रहे, बल्कि इस बात में है कि हम अपने आप को न बदलें वो भी दूसरों की वजह से। और जहाँ तक हिसाब की बात है, वो तो हर किसी का होता है… आज नहीं तो कल।

आगे के लिए बस यही सीख साथ रखो खुद पर थोड़ा और काम करो, खुद को और मज़बूत बनाओ, ताकि अगली बार वो न झेलना पड़े, जिससे आज तुम्हें दो-चार होना पड़ रहा है।

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