Thursday, 10 September 2026

 अपना समय लीजिए…

हर किसी को अपनी तरफ़ से वक़्त भी दीजिए, जानकारी भी और महत्व भी।

फिर थोड़ा पीछे हटकर देखिए—
कौन आपकी मौजूदगी में कैसा होता है,
और आपकी गैरमौजूदगी में कैसा।

खासकर तब,
जब वही बातें किसी दूसरे के सामने दोहराई जाएँ
जिन पर कभी आप दोनों एक ही पन्ने पर खड़े थे।

वहीं से असली तस्वीर दिखने लगती है।
बातों में नहीं, व्यवहार में बदलाव देखिए।
किसके सामने सोच बदलती है,
किसके लिए शब्द बदलते हैं,
और किसके आने पर आपकी कही हुई बातों का मतलब बदल जाता है।

अगर कभी महसूस हो कि
किसी के शब्द और उसके व्यवहार के बीच फ़ासला बढ़ रहा है,
तो तुरंत सवाल मत कीजिए…
बस ख़ामोशी से थोड़ा और देखिए।

क्योंकि इंसान की असलियत
उसके कहे हुए शब्दों से कम,
और अलग-अलग लोगों के साथ उसके बदले हुए व्यवहार से ज़्यादा दिखाई देती है।

और जब तस्वीर पूरी साफ़ हो जाए…
तो किसी से शिकायत मत कीजिए।

बस अपनी जगह बदल दीजिए।

क्योंकि हर किसी को अपना सब कुछ देने के बाद भी
अगर कोई आपका नहीं हुआ,
तो शायद कमी आपके देने में नहीं थी…
वह रिश्ता ही आपका था नहीं।

No comments:

Post a Comment