महीने साल दिन ब दिन यूँ ही गुजरते जा रहे है
न हम अपने गम से खाली
न हम उनके खयालो मैं आ रहे है
मस्जिद की मीनार तले दबे मंदिर के कंगूरे भी अब बोल उठे है
मंदिर वही बनेगा बोल दो अब छद्म धर्मनिरपेक्षता के लंगूरो से
देखने पर मेरे, जवाब में तुम, बेबात की हंसी न मिलाओ
दिल गर नहीं मिलते, तो अच्छा है, हाथ भी न मिलाओ।
कब तक तन को यूँ ही नहलाते रहोगे कभी सोच को भी नेहला के देखो
खुद बदले खूब तुमने , कभी मैली सोच के भी कपडे बदल के तो देखो।
Wednesday, 9 October 2019
नाम तारीफ़े शोहरत की लालसा ये सब बातें फिजूल है
खुशबू खुद बा खुद गवाही देती है के ये कोन सा फूल है
Saturday, 28 September 2019
प्यार है बेइंतहा और कुछ लड़ाई भी है
इक जिस्म दो जान है, मगर एक खाई भी है
रहना गवारा नहीं बीना उसके मुझको देखो
मगर तन्हा वहां परेशान वो भी है
आरजू है मिल जाये शक्कर और पानी की तरह
मगर का करे ज़िन्दगी लेती इम्तिहान भी है
अगर कहेंगे मोहब्बत है तुमसे
तुम कहोगे इम्तिहान दे दो
हम कहेंगे दिल आपका
बेसक से अब आप जान ले लो
किताब बन के आओ ज़िंदगी मैं
पड़ने की तुमको बड़ी जुस्तजू है।