Saturday, 15 May 2021

 वो कह देना जा अब न होगी बात तेरी मेरी फिर कभी 

और हर गुनगुनाती घंटी पे सोचना तेरा फ़ोन आया है 

भूल कर भी भूले से न मिलेंगे अब सब ख़तम दरमियाँ 

और फिर हर आहट पे सोचना के चौखट पे तुम आये 

 रखोगे फूलो की ख्वाइश और कांटो से डरोगे 

ए मेरे दोस्त ऐसे कैसे तुम दुनिया से लड़ोगे। .

Saturday, 13 February 2021

 तख्तनशी होने को हमने भी आरोपे पे आरोपे  के पुलिंदों का ढेर लगाया था 

वो वक़्त लौट के फिर मुँह मेरे आएगा ये अनुमान तब हमने कहाँ लगाया था 

खुश थे, तब अपनी बारी थी, तब वो और उसकी बातें लगती प्यारी प्यारी थी 

वो वही है जहाँ था, पर अब न वो रहा प्यारा, न बातें लगती उसकी प्यारी प्यारी

Saturday, 5 December 2020

 एक झूठ को छुपाने में हजार झूठ और बोलने पड़ेंगे 

और अगर झूठ बोलने से सच में कौआ काटने लगे 

तो दुनिया में  दिलजले कम और घायल जयदा होंगे।

Sunday, 2 August 2020

काफी दिन हुए न कोई ख्याल ही आया न ही कुछ लिख पाया 
आज जो फुरसत मिली तो मैंने खुद को बड़ा मशरूफ पाया। 

Sunday, 5 July 2020

सालो साल से यंही ठहरा है ये दरिया, समेटे अनगिनत कहानिया अपने अंदर 
मिले फुर्सत तो पड़ना ख़ामोशी इसकी , पाओगे तुम एक ठहराव अपने अंदर 
जुस्तजू है इसको भी मिलने की समंदर में मगर नसमझ अनजान है मेरी तरह 
इसको क्या पता ये न रहेगा फिर दरिया जो मिल गया ये जाके समंदर के अंदर।