हर लम्हा मशरूफ तुम , तुम्हारी मशरूफियत की वजह क्या है
यूँ इस कदर तड़पते हो हमे तुम और पूछते हमारी सजा क्या है
हर लम्हा मशरूफ तुम , तुम्हारी मशरूफियत की वजह क्या है
यूँ इस कदर तड़पते हो हमे तुम और पूछते हमारी सजा क्या है
ख्याल ख्वाब आरज़ू नाजुक सब थे कांच की तरह
हम नादान लेके निकले इन्हे पत्थर की दुनिया मैं।
हर एक शख्स चला है, एक कहानी लेके साथ में
कोई तन्हा चला, कोई हाथ लेके किसी का हाथ में
चार लोगो मैं मुझ को एक दम से अजनबी बना देना तेरा
तन्हाई मैं रूह से भी जायदा वो मेरे क़रीब आ जाना तेरा
वो अजनबी सी शाम ढलने को आई है एक बार फिर से
अब बहुत चुभता है
कभी अपना और कभी गैरो भी से पराया बना देना तेरा।
इंतज़ार किस्मत मैं और दिल की बात अधूरी सी
सुना के तुम आओगे
कदमो से मिलो नाप दिए वो महफ़िल ज़रूरी थी
मिलके बताना था इंतज़ार और दिल की बात तुम्हे
शायद तब तुम जानो
तुम्हारी आवाज़ और लफ्ज क्यों मेरी मजबूरी थी।
दर्द में राहत , तन्हाई मैं कोई साथ दे दे
ए ख़ुदा ऐसा हमदर्द सब को एक हाथ दे दे
जहाँ देखो वहां सिर्फ उनकी यादो के जाले है
सोच के हसी आती खुद पे
हमने भी कैसे कैसे यह अजब शौक पाले है