घर में पड़े-पड़े गुजर जाएगी उमर तेरी...
घर से निकल, ठोकरें खा, तजुर्बे सीख।
नहीं मिलता शिखर किसी को यूँही,
रास्ते भी देते हैं ज़ख्म काई गहरे ।
देख चेहरे इस दुनिया के, ऐ दोस्त...
तब जाके रोशन होगी तकदीर तेरी।
No comments:
Post a Comment