Thursday, 18 June 2026

 लगाव हो तो गिला भी होगा,

तअल्लुक़ हो तो शिकवा भी होगा।

बेज़ार रिश्तों में ख़ामोशी घर कर जाती है,

वरना यूँ ही कोई किसी का नहीं होगा।

जिस दिन लौ बुझ जाएगी एहसास की ,

शिकवे भी ख़ुद-ब-ख़ुद ख़ामोश हो जाएँगे।

फिर न तुम मेरा ज़िक्र करोगे,

न मैं तुम्हें पुकार पाऊंगा 

फिर तुम अपनी राह के मुसाफ़िर,

और मैं अपनी मंज़िल का राहगीर हो जाऊंगा

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