रोज़गार हो तो सोमवार,
वरना हर दिन इतवार।
उनके इतवार को सोमवार बनाया
सुकून भी अपना गँवाया
शुक्रिया तो छोड़ो , मिले इल्ज़ाम हज़ार ,
जिनके दिन सँवारे, मिले उन्हीं से घाव ।
जिनके लिए हमने ख़ुद को भुलाया ,
नजरो मैं उनकी , मैं ही ग़लत नज़र आया
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