Sunday, 11 October 2026

 रोज़गार हो तो सोमवार,

वरना हर दिन इतवार।

उनके इतवार को सोमवार बनाया 

सुकून भी अपना गँवाया 

शुक्रिया तो छोड़ो , मिले इल्ज़ाम हज़ार ,

जिनके दिन सँवारे, मिले उन्हीं से घाव ।

जिनके लिए हमने ख़ुद को भुलाया ,

नजरो मैं उनकी , मैं ही ग़लत नज़र आया 

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