मनुष्य प्रेम इसलिए नहीं खोजता कि उसके पास कोई नहीं है,
वह प्रेम इसलिए खोजता है क्योंकि उसके भीतर अनकहे एहसासों का एक संसार बसता है।
ताकि वह अपने डर, अपने सपने, अपनी उलझनें और अपनी ख़ामोशियाँ
किसी के पास बेख़ौफ़ छोड़ सके।
इसीलिए मनुष्य को मनुष्य चाहिए,
सिर्फ़ साथ के लिए नहीं,
बल्कि समझे जाने के लिए।
No comments:
Post a Comment