Sunday, 11 October 2026

 पूछ तो लूँ हाथों में हाथ लेकर, तेरी हर परेशानी का हाल… 

मगर डरता है ये दिल, कहीं तेरी परेशानियों की वजह मैं ही तो नहीं।

 

हम आदतें कुछ इस क़दर बिगाड़ जाएँगे, 
कि हमारे बाद कहते फिरोगे
 ख़याल रखना हो, तो उसकी तरह रखना।

 अजीब फ़र्क़ है ना… 

कोई क़रीब होकर भी तुम्हें देख नहीं पाता, 

और कोई दूर रहकर भी तुमसे नज़रें हटा नहीं पाता।

 अजीब है रिश्तों का तअल्लुक़ भी…

मोहब्बत का कोई हिसाब नहीं रखता, मगर कमियों का हर पन्ना संभालकर रखा जाता है।

 रोज़गार हो तो सोमवार,

वरना हर दिन इतवार।

उनके इतवार को सोमवार बनाया 

सुकून भी अपना गँवाया 

शुक्रिया तो छोड़ो , मिले इल्ज़ाम हज़ार ,

जिनके दिन सँवारे, मिले उन्हीं से घाव ।

जिनके लिए हमने ख़ुद को भुलाया ,

नजरो मैं उनकी , मैं ही ग़लत नज़र आया 

Wednesday, 7 October 2026


कुछ बातें तेरी याद रहीं,

कुछ मेरी ख़ामोशी में थीं,

पता दोनों को है 

मंज़िलें अपनी एक नहीं थीं।


फिर भी जब हम तुम मिले,

दिल ने थोड़ा चैन लिया,

कहा कुछ नहीं तुमने,

पर दिल ने कुछ महसूस किया।


सोचा, शायद तुम भी कभी-कभी,

मेरी तरह ठहर जाते हो,

कोई मेरी बात याद करके,

बे-वजह मुस्कुराते हो।



ना वादा, ना कोई हक़ अपना,

ना कल का कोई ख़्वाब रखा,

जितना मिला, उतना जी लिया,

बाक़ी उस पर छोड़ दिया।



कभी तुम्हारी हँसी याद आई,

कभी वो अधूरी-सी शाम,

लगा तुम सामने बैठे हो,

और चलती रही घंटों बात।


कभी मेरी उलझन पढ़ ली तुमने,

कभी मैंने तुम्हारी थकान सुनी,

कोई वादा नहीं दरमियाँ अपने,

फिर भी कमी तुम्हारी लगी।



तेरी बातों में सुकून था,

मेरी बातों में ठहराव,

तुम मेरे थे ही नहीं कभी,

फिर क्यों इतना ये लगाव?


शायद तुमने चाहा हो मुझे,

या शायद बस मेरी फ़िक्र रही,

जो भी था, ख़ूबसूरत था,

उसे नाम देने की ज़िद नहीं।



कुछ लोग मिलते हैं ज़िंदगी के सफ़र में,

पर सफ़र उनका पूरा नहीं होता,

रखते हैं याद एक-दूसरे को,

हर रिश्ता मुकम्मल नहीं होता।



कल फिर अपनी-अपनी राहें होंगी,

शायद ये बातें भी ना होंगी,

हो जाएँ मशग़ूल अपनी ज़िंदगी में,

पर ये गुफ़्तगू याद रहेगी।


हाँ…

ये गुफ़्तगू याद रहेगी।

Tuesday, 6 October 2026

 सुकून वहीं है जहाँ उम्मीदें कम और शुक्रिया ज़्यादा हो,

ज़िंदगी को जीते रहिए… हर खुशी के लिए वजह ज़रूरी नहीं।