अब कोई रूठे या रूठ कर चला जाए दूर कहीं,
मनाने का उसे, ख्याल अब इस दिल में आता नहीं।
गया है वो तो दिल से यह मलाल भी गया साथ उसके,
अब कोई जाए जहाँ चाहे, मैं किसी को रोकता नहीं।
दिल भी आराम-पसंद है, कोई मिले तो मिल लेता हूँ,
वरना मैं खुद से राजी हूँ, अब किसी के पास जाता नहीं।
घंटों बातें कर लेता था, जब दिल मिल जाता था किसी से,
दिखाए कोई बेरुखी थोड़ी भी, तो अब मैं पास बैठता नहीं।
सुकून है कि लोग कम हैं, जिन्होंने बढ़ा रखी थी परेशानी,
अब कुछ भी हो जाए, घंटों किसी के बारे में सोचता नहीं।
अब अपनी ही दुनिया में खुश हूँ, यही जीने का सलीका है,
कोई साथ चले तो ठीक, न चले, मैं किसी से पूछता नहीं।
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