कभी-कभी इश्क़ किसी शख़्स से नहीं,
उसके होने की आदत से हो जाता है।
क्यूंकि वक़्त का भी अजीब फ़ितूर है,
अजनबी को अपना और फ़ासलों को कम
और अपने दर्द को वो मोहब्बत कर देता है।
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